
कोटद्वार की सर्द हवा में आज की यह बैठक किसी गरम चाय की तरह थी—ऊपर से भाप उठती हुई, नीचे तलहटी में असलियत का स्वाद लिए हुए। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने जब अधिकारियों को बुलाया, तो माहौल कुछ ऐसा था कि मानो कोटद्वार की हर समस्या ने मौका देखकर अपनी-अपनी कुर्सी पहले से आरक्षित कर रखी हो।
टी.ओ. क्वार्टर में बैठे प्रबुद्धजन, व्यापार मंडल, पार्षद और क्षेत्रवासी अपने-अपने मुद्दों के साथ ऐसे सजग दिखे, जैसे वर्षों से इंतज़ार कर रहे हों कि कोई तो आए और इन ‘पुरातन’ समस्याओं की धूल झाड़े। और फिर शुरू हुआ मुद्दों का सिलसिला—सड़क, पानी, बिजली, नशा, पाइपलाइन, यातायात… एक ऐसा ‘मल्टीप्लेक्स पैकेज’ जिसमें हर विभाग का अपना-अपना शो चल रहा था।
व्यापार मंडल ने सत्यापन और ट्रैफिक चालान पर रोष जताया—उनके चेहरे बताते थे कि शहर में गाड़ी चलाना अब फिटनेस टेस्ट जैसा हो गया है। अध्यक्ष ने तुरंत निर्देश दिए—“सुधार करो भई, जनता ड्राइव कर रही है, जमानत नहीं!”
एडीबी की पाइपलाइन गुणवत्ता पर सवाल उठे—पार्षदों के तर्क सुनकर लग रहा था कि पाइपलाइन कम और जनता की सहनशीलता ज्यादा लीक हो रही है। अध्यक्ष ने सख्त निर्देश दिए, मानो कह रही हों कि अब बहाने नहीं, सिर्फ समाधान चलेगा।
कण्वघाटी का चाइल्ड मैटरनिटी वार्ड अब भी खुलने का इंतज़ार कर रहा है—अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा, “बन तो गया, अब चल भी पड़ना चाहिए, जनता इसे म्यूज़ियम नहीं देखना चाहती!”
नशे के खिलाफ सख्ती की बात हुई—बातों से यह साफ था कि शहर में कुछ लोग ‘अपना संसार’ दूसरी ही दिशा में बना रहे हैं। पुलिस को सख्त कदमों के निर्देश देकर अध्यक्ष ने यह संदेश दे दिया कि कोटद्वार में ‘नशे का कारोबार’ अब ‘अवांछित मेहमान’ की तरह देखा जाएगा।
परिवहन विभाग को भी दो टूक कहा गया कि चालान वहीं करें जहां ट्रैफिक में सुधार हो, न कि वहां जहां जनता परेशान हो—किसी को भी पसंद नहीं कि वो मार्केट जाने निकले और वापस चालान का ‘स्मृति चिह्न’ लेकर लौटे।
कुल मिलाकर बैठक में उपस्थित अधिकारियों और गणमान्य लोगों ने यह अनुभव किया कि आज की बैठक केवल चर्चा नहीं, बल्कि ‘कार्रवाई की चेतावनी’ थी। समस्याओं को गंभीरता से सुना गया, समाधान की जिम्मेदारी तय हुई और संदेश साफ था—कोटद्वार बदलना है, और अभी बदलना है।
थोड़ा तंज, थोड़ा व्यंग्य और भरपूर सकारात्मक उम्मीद के साथ—
अगर इस बैठक के बाद कोटद्वार की समस्याएं अभी भी नहीं सुधरतीं, तो फिर अगली बैठक में शायद समस्याओं को भी पासबुक साथ लानी पड़ेगी कि उनकी उम्र कितनी हो चुकी है!








