रेडियोग्राफरों की ‘साइलेंट सर्विस’ को मिली नई ताकत, महेंद्र भंडारी अध्यक्ष, अभय नेगी महामंत्री

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देहरादून में इंडियन सोसाइटी ऑफ रेडियोग्राफर एंड टेक्नोलॉजिस्ट के स्टेट चैप्टर का गठन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि ये उस व्यवस्था का आईना भी है जिसमें असल काम करने वाले लोग अक्सर पर्दे के पीछे रह जाते हैं—और वही लोग आज आगे आए हैं। रेडियोग्राफर, जिन्हें अस्पतालों में कोई फूल माला नहीं पहनाता, कोई फुटेज नहीं बनती, पर इलाज की पूरी प्रक्रिया उन्हीं की सटीकता पर टिकी रहती है। मशीन की बीप और रिपोर्ट की लाइनों में भविष्य देखने वाले ये लोग अब खुद अपनी आवाज बुलंद करने के लिए संगठित हो रहे हैं—ये अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है।

नए स्टेट चैप्टर की कमान महेंद्र भंडारी के हाथों में दी गई है—ऐसे व्यक्ति, जिनकी पहचान किसी कुर्सी से नहीं, बल्कि उनके मृदु स्वभाव और मेहनत से बनी है। भंडारी उन दुर्लभ लोगों में हैं जो आदेश देने से ज्यादा टीम के साथ चलने पर यकीन रखते हैं। उनके शब्द कम, काम ज्यादा बोले जाते हैं। रेडियोग्राफी की तकनीकी दुनिया जितनी जटिल है, उतने ही सरल स्वभाव वाले भंडारी इस संगठन को मजबूत नेतृत्व देने की क्षमता रखते हैं।

अभय नेगी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिलना भी एक संकेत है कि अब तकनीकी समझ और धरातलीय अनुभव को महत्व दिया जा रहा है। जनरल सेक्रेटरी से लेकर उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और प्रवक्ता तक—एक पूरी टीम तैयार हुई है, जो सिर्फ पद से नहीं, बल्कि पेशे की जरूरतों को समझने की क्षमता से लैस दिखती है।

कार्यक्रम में आए राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने सही ही कहा कि रेडियोग्राफर चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ हैं। पर विडंबना यह है कि रीढ़ हमेशा दिखाई नहीं देती—पर उसके बिना शरीर खड़ा भी नहीं रह सकता। आजतक इस क्षेत्र के लोग तकनीक संभालते रहे, अब अपनी तकनीकी पहचान और अधिकारों को भी सँभालने के लिए मैदान में उतर रहे हैं। यह देर से सही, लेकिन बेहद जरूरी कदम है।

देशभर में 22 हजार सदस्यों का नेटवर्क और प्रदेश में रोजगार, पदोन्नति, वेतन व अन्य मसलों को उठाने का संकल्प—ये दिखाता है कि संगठन अब सिर्फ फोटो खिंचवाने या बधाई संदेश देने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक परिवर्तन के लिए खड़ा हो रहा है।

महेंद्र भंडारी की सरलता और नेतृत्व क्षमता, अभय नेगी की प्रतिबद्धता और टीम के सामूहिक संकल्प से उम्मीद बनती है कि रेडियोग्राफरों की इस ‘साइलेंट सर्विस’ को अब वह सम्मान मिलेगा जिसकी वह लंबे समय से हकदार है।

कभी-कभी समाज की सबसे बड़ी उन्नति वहीं से शुरू होती है जहां लोग शोर नहीं, काम करते हैं—और यह टीम ऐसी ही दिखाई देती है।

Khushi
Author: Khushi

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