पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित डॉ आर राजेश कुमार — स्वास्थ्य प्रशासन में ठोस कामकाज की पहचान

SHARE:

देहरादून के गलियारों में स्वास्थ्य विभाग का नाम जब भी गंभीर कामकाज के लिए लिया जाएगा तो आर राजेश कुमार अपने आप याद आएंगे यह कोई प्रशस्ति पत्र की भाषा नहीं बल्कि विभागीय हकीकत है जिस दौर में फाइलें इलाज से ज्यादा बीमार रहती थीं उस दौर में स्वास्थ्य प्रशासन को इलाज मिला तो वह इन्हीं के हाथों मिला

आर राजेश कुमार उन अफसरों में हैं जिनके लिए कुर्सी ताकत नहीं जिम्मेदारी होती है स्वास्थ्य विभाग में आते ही उन्होंने यह साबित किया कि नीति सिर्फ कागज के लिए नहीं होती जमीन पर उतारने के लिए होती है अस्पतालों की व्यवस्था हो मानव संसाधन का प्रबंधन हो या योजनाओं की मॉनिटरिंग हर जगह एक ही संदेश गया अब काम चलेगा बहाने नहीं

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में सिस्टम को व्यक्ति पर हावी किया पहले जहां अफसर बदलते ही प्राथमिकताएं बदल जाती थीं वहां अब प्रक्रियाएं चलती दिखती हैं डिजिटल निगरानी हो या सेवाओं का विकेंद्रीकरण इलाज तक पहुंच का रास्ता आसान हुआ है और यही किसी भी स्वास्थ्य प्रशासक की असली परीक्षा होती है

व्यंग्य यह है कि जब बाकी विभाग अक्सर फीताकाट संस्कृति में उलझे रहते हैं तब स्वास्थ्य विभाग चुपचाप परिणाम देता रहा क्योंकि यहां दिखावा कम और डिलीवरी ज्यादा रही आर राजेश कुमार ने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ हो तो स्वास्थ्य जैसे जटिल विभाग में भी ऐतिहासिक काम किया जा सकता है

पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया का राष्ट्रीय पुरस्कार दरअसल एक अफसर को नहीं उस सोच को सम्मान है जिसमें प्रशासन का मतलब नियंत्रण नहीं सेवा होता है उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में जो स्थायित्व और दिशा दिखती है वह किसी संयोग का नतीजा नहीं बल्कि एक काबिल आईएएस की रणनीति और मेहनत का परिणाम है

Khushi
Author: Khushi

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई