
आईएसबीटी में वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था पर जिस तरह से जिलाधिकारी सविन बंसल ने सीधा हस्तक्षेप किया, उसने यह साफ कर दिया कि अब प्रशासनिक ढिलाई के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी। निरीक्षण महज़ औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि उसके तुरंत बाद ज़मीन पर कार्रवाई दिखाई देना डीएम बंसल की कार्यशैली और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। बंद पड़ा निकासी गेट खुलना, पार्किंग निर्माण का शुरू होना और अतिक्रमण पर सख्ती इस बात का प्रमाण है कि निर्देश केवल फाइलों तक सीमित नहीं हैं।
डीएम बंसल का रुख स्पष्ट है सार्वजनिक व्यवस्था से समझौता नहीं होगा। आईएसबीटी जैसे संवेदनशील और व्यस्त क्षेत्र में यातायात अव्यवस्था को उन्होंने प्रशासनिक विफलता मानते हुए संबंधित विभागों को समय-सीमा में काम पूरा करने का अल्टीमेटम दिया। फ्लाईओवर के नीचे नियोजित और कलर कोड आधारित पार्किंग की योजना यह बताती है कि निर्णय केवल तात्कालिक राहत के लिए नहीं, बल्कि स्थायी समाधान के लिए लिए जा रहे हैं।
यह दृढ़ता इसलिए भी अहम है क्योंकि अतिक्रमण और अव्यवस्था अक्सर राजनीतिक और स्थानीय दबावों के कारण जस की तस बनी रहती है। डीएम बंसल का स्पष्ट संदेश है कि कानून और जनहित से ऊपर कोई नहीं। अब प्रशासन की इस सख्ती को निरंतरता की ज़रूरत है। यदि यह रुख बरकरार रहता है, तो आईएसबीटी ही नहीं, बल्कि पूरे देहरादून में प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही की नई मिसाल कायम हो सकती








