
देहरादून के शहरी विकास पर वर्षों से लगा अवैध प्लॉटिंग का दाग अब धीरे-धीरे मिटता दिखाई दे रहा है और इसके केंद्र में एक ऐसी प्रशासनिक इच्छाशक्ति उभर रही है, जो दबाव, सिफारिश और भय से परे निर्णय लेने का साहस रखती है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की कार्यशैली यह स्पष्ट संकेत देती है कि वे केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरकर व्यवस्था को पटरी पर लाने का संकल्प रखने वाले प्रशासक हैं। सेरगढ़ माजरी ग्रांट में 20 बीघा अवैध प्लॉटिंग पर की गई कार्रवाई इसी अटल और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है।
अवैध कॉलोनियों का नेटवर्क वर्षों से प्रशासनिक शिथिलता का लाभ उठाकर फलता-फूलता रहा है। इसमें भू-माफिया, बिचौलिये और कभी-कभी राजनीतिक संरक्षण भी शामिल रहा है। ऐसे माहौल में बिना किसी दबाव के खुली कार्रवाई करना आसान नहीं होता। बंशीधर तिवारी का रुख इसलिए अलग और प्रभावशाली दिखता है क्योंकि वे कानून को विकल्प नहीं, बल्कि अंतिम सत्य मानकर आगे बढ़ते हैं। उनके लिए नियोजित विकास केवल नीति दस्तावेज़ों की भाषा नहीं, बल्कि धरातल पर लागू होने वाली प्रतिबद्धता है।
उनकी सोच में विकास और सख्ती एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। अवैध प्लॉटिंग पर सख्त प्रहार करके वे दरअसल आम नागरिकों के भविष्य को सुरक्षित कर रहे हैं। बिना स्वीकृति विकसित कॉलोनियां अंततः लोगों की जीवनभर की कमाई को संकट में डालती हैं, जहां न बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं और न ही कानूनी संरक्षण। ऐसे में तिवारी का यह स्पष्ट संदेश कि नियमों से कोई समझौता नहीं होगा, प्रशासनिक संवेदनशीलता और दूरदर्शिता दोनों को दर्शाता है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि उनकी कार्यशैली दिखावटी नहीं, निरंतर और परिणामोन्मुख है। प्रवर्तन टीमों की सक्रियता, मौके पर शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी यह बताती है कि नेतृत्व केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसे अधिकारी की छवि बनाता है जो जोखिम उठाने से नहीं हिचकता और व्यवस्था को सुधारने के लिए अलोकप्रिय फैसले लेने को भी तैयार है।
कुल मिलाकर, बंशीधर तिवारी एमडीडीए को उस दिशा में ले जाते दिख रहे हैं, जहां नियोजित शहरी विकास केवल नारा नहीं, बल्कि व्यवहार बनता है। उनकी अटल और दृढ़ इच्छाशक्ति यह भरोसा पैदा करती है कि यदि यही रुख बना रहा, तो देहरादून में अवैध प्लॉटिंग का खेल ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। यह प्रशासनिक सख्ती नहीं, बल्कि शहर के भविष्य के प्रति एक जिम्मेदार और साहसी प्रतिबद्धता है।








