
हरिद्वार की कानून-व्यवस्था आज जिस सख़्ती और अनुशासन के साथ दिखाई दे रही है, उसके पीछे एसएसपी परमेंद्र डोभाल की स्पष्ट सोच, तेज़ निर्णय क्षमता और ज़ीरो टॉलरेंस की नीति साफ़ झलकती है। अपराध के प्रति कोई नरमी नहीं, कोई भ्रम नहीं—बस सीधी कार्रवाई। यही कारण है कि अपराधी या तो सलाखों के पीछे हैं या ज़िले की सीमाओं से बाहर होने को मजबूर।
परमेंद्र डोभाल की कार्यशैली केवल पुलिसिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है—हरिद्वार में कानून से बड़ा कोई नहीं। संगठित अपराध, नशे का नेटवर्क, हिस्ट्रीशीटर और माफ़िया तत्वों पर जिस रणनीतिक तरीके से शिकंजा कसा गया है, उसने अपराध की कमर तोड़ दी है। थानों से लेकर फील्ड तक जवाबदेही तय है, लापरवाही पर कार्रवाई और बेहतर काम पर खुली सराहना—यही संतुलन उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
जनसुरक्षा और अपराध नियंत्रण के बीच संतुलन बनाते हुए एसएसपी डोभाल ने पुलिस की छवि को भी मज़बूत किया है। आम नागरिक को भरोसा मिला है कि पुलिस साथ है, जबकि अपराधी जान चुके हैं कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं। यही वजह है कि आज परमेंद्र डोभाल का नाम अपराधियों के लिए ‘काल’ और जनता के लिए सुरक्षा का भरोसा बन चुका है।








