
अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ अब प्रशासनिक चेतावनी नहीं, सीधी कार्रवाई दिखाई दे रही है और इसके केंद्र में हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भरोसेमंद उपाध्यक्ष एमडीडीए व अपर सचिव मुख्यमंत्री, आईएएस बंशीधर तिवारी। उनके तेवर साफ बता रहे हैं कि देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर जमीन के सौदे करने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। तिवारी के रडार पर आते ही अवैध प्लॉटिंग करने वालों की सारी “योजनाएं” ध्वस्त होती दिख रही हैं।
यह सिर्फ बुलडोजर चलने की कहानी नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट प्रशासनिक सोच का प्रतिबिंब है। पहले नियमानुसार निरीक्षण, फिर नोटिस और उसके बाद बिना किसी दबाव या भेदभाव के ध्वस्तीकरण—यह संदेश दे रहा है कि सत्ता या रसूख के दम पर नियमों से बच निकलने का दौर खत्म हो चुका है। मुख्यमंत्री धामी के सुशासन मॉडल को जमीन पर उतारते हुए बंशीधर तिवारी ने यह साफ कर दिया है कि विकास का मतलब अव्यवस्था नहीं, बल्कि नियोजन और अनुशासन है।
अवैध प्लॉटिंग माफिया वर्षों से भोली-भाली जनता की गाढ़ी कमाई से खेलते रहे हैं। न ले-आउट, न सीएलयू, न मूलभूत सुविधाएं—सिर्फ सपने दिखाकर जमीन बेची जाती रही। अब वही माफिया प्रशासनिक सख्ती के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। तिवारी का बुलडोजर सिर्फ दीवारें और सड़कें नहीं गिरा रहा, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को तोड़ रहा है जो नियमों की अनदेखी पर फल-फूल रहा था।
इस कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश आम जनता के लिए है—कानून आपके साथ है। अगर प्रशासन मजबूत नीयत और स्पष्ट नीति के साथ खड़ा हो, तो अवैध धंधों की जड़ें ज्यादा दिन टिक नहीं सकतीं। बंशीधर तिवारी की कार्यशैली यह दिखाती है कि जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि फील्ड में उतरकर परिणाम देने की है।
कुल मिलाकर, अवैध प्लॉटिंग करने वालों पर तिवारी के तेवर भारी पड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में एमडीडीए अब सिर्फ चेतावनी देने वाला विभाग नहीं रहा, बल्कि कार्रवाई करने वाला प्रशासन बन चुका है। यह साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में भी अवैध प्लॉटिंग करने वालों के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी, क्योंकि तिवारी का रडार लगातार सक्रिय है और सुशासन की यह मुहिम रुकने वाली नहीं है।








