देहरादून में अवैध प्लॉटिंग पर सबसे भारी बंशीधर तिवारी, कानून का बुलडोज़र चला बेखौफ

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यह रहा आपका सटीक, धारदार, देशी हिंदी में शधा हुआ एडिटोरियल,बिना हेडिंग, सीधे पब्लिश करने लायक़:
देहरादून में अवैध प्लॉटिंग कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि इस बीमारी पर बिना झिझक, बिना दबाव और बिना सौदेबाज़ी के सीधा वार किया जा रहा है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने साफ कर दिया है कि कानून सिर्फ़ किताबों में नहीं, ज़मीन पर चलता है ,और अगर नियम तोड़े गए तो बुलडोज़र भी ज़मीन पर ही चलेगा।
बंशीधर तिवारी का तेवर सादा है, भाषा सरल है, लेकिन निर्णय बेहद कठोर। यही वजह है कि अवैध प्लॉटिंग के कारोबारी अब सबसे ज़्यादा इसी नाम से असहज हैं। बिना शोर किए, बिना प्रचार की भूख रखे, वे हर रोज़ फील्ड में उतरकर यह साबित कर रहे हैं कि प्रशासनिक कुर्सी आराम के लिए नहीं, कार्रवाई के लिए होती है। उनका तरीका साफ है, पहले चिन्हांकन, फिर नोटिस और फिर बिना किसी दबाव के सीधी कार्रवाई।
करीब दस हजार बीघा ज़मीन पर बुलडोज़र चलना और हजार से अधिक निर्माणों की सीलिंग सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये उस प्रशासनिक इच्छाशक्ति का प्रमाण हैं, जो सालों से दबे पड़े सिस्टम को झकझोर रही है। अवैध कॉलोनियों की आड़ में पल रहा काला कारोबार पहली बार असली डर महसूस कर रहा है। जिन हाथों ने नियमों को मज़ाक बना रखा था, आज वही हाथ कानून की सख़्ती देखकर कांप रहे हैं।
बंशीधर तिवारी की सबसे बड़ी ताकत उनका संतुलन है। स्वभाव से सरल, व्यवहार में सहज, लेकिन निर्णय के वक्त पूरी तरह अडिग। वे जानते हैं कि अवैध प्लॉटिंग सिर्फ जमीन का खेल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा अपराध है। यही सोच उन्हें पर्यावरण, ट्रैफिक, जल संकट और आपदा प्रबंधन के बड़े खतरे दिखाई देती है, जो अवैध बसावट से पैदा होते हैं। इसलिए उनका अभियान सिर्फ कार्रवाई नहीं, आने वाले समय को सुरक्षित करने की कोशिश है।
देहरादून जैसे संवेदनशील शहर में वर्षों से सत्ता, सिस्टम और पैसे की मिलीभगत से अवैध प्लॉटिंग फलती-फूलती रही। कई अधिकारी आए, गए, लेकिन ठोस चोट कोई नहीं कर पाया। बंशीधर तिवारी ने वही किया जो एक ईमानदार प्रशासक को करना चाहिए  बिना चेहरा देखे, बिना नाम पूछे, बिना दबाव माने, कानून को उसका असली सम्मान दिलाया।
आज एमडीडीए का बुलडोज़र सिर्फ मिट्टी नहीं तोड़ रहा, वह उस सोच को भी ध्वस्त कर रहा है जिसमें नियमों को तोड़ना चालाकी समझी जाती थी। यह कार्रवाई उन ईमानदार नागरिकों के लिए राहत है, जो वर्षों से नियमानुसार निर्माण कर परेशान होते रहे और अवैध कॉलोनियों को फलते देखते रहे।
बंशीधर तिवारी का यह तेवर अगर ऐसे ही कायम रहा तो देहरादून में अवैध प्लॉटिंग का नेटवर्क बिखरना तय है। यह सिर्फ प्रशासनिक सख़्ती नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है,कानून से बड़ा कोई नहीं, और नियम तोड़ने वालों के लिए अब इस शहर में कोई सुरक्षित कोना नहीं बचेगा।

Khushi
Author: Khushi

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