देहरादून का वह वीकेंड आम नहीं था पहाड़ों की ओर बढ़ते कदमों के साथ सड़कों पर वाहनों का सैलाब उमड़ा जिसने पूरे शहर की परीक्षा ले ली मसूरी चकराता और ऋषिकेश जाने वाली हर सड़क दबाव में थी लेकिन इस बार हालात अलग थे
कमांड संभाले हुए थे प्रमेंद्र डोबाल एक शांत लेकिन बेहद मजबूत नेतृत्व के साथ उन्होंने पहले ही स्थिति को भांप लिया था उनका स्पष्ट निर्देश था ट्रैफिक को रोकना नहीं बल्कि उसे नियंत्रित तरीके से बहने देना है
पूरा शहर जोन और सेक्टर में बांट दिया गया हर अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई रूट प्लान जमीन पर उतारा गया किमाड़ी मार्ग जैसे विकल्प को सक्रिय कर दबाव कम किया गया एंट्री और एग्जिट अलग कर शहर को जाम से बचाया गया
सड़क पर तैनात पुलिसकर्मी सिर्फ ड्यूटी नहीं निभा रहे थे वे एक सटीक रणनीति का हिस्सा थे 27 मोबाइल टीमें लगातार सक्रिय रहीं हर संभावित जाम को बनने से पहले खत्म कर दिया गया गूगल मैप तक पर अपडेट कर यह दिखा दिया गया कि यह आधुनिक पुलिसिंग का उदाहरण है
अतिक्रमण सड़क की खराब हालत और भारी भीड़ जैसी चुनौतियां सामने थीं लेकिन हर समस्या को चिन्हित कर समाधान की दिशा में तुरंत कदम बढ़ाए गए यही मजबूत नेतृत्व की पहचान होती है
नतीजा साफ रहा जहां जाम की आशंका थी वहां ट्रैफिक चलता रहा लोग बिना परेशानी अपने गंतव्य तक पहुंचे
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब नेतृत्व मजबूत हो रणनीति सटीक हो और टीम समर्पित हो तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों व्यवस्था कमजोर नहीं पड़ती
प्रमेंद्र डोबाल ने इस वीकेंड सिर्फ ट्रैफिक नहीं संभाला बल्कि यह दिखा दिया कि सही नेतृत्व शहर की रफ्तार को थमने नहीं देता








