हरिद्वार में बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही DPRO अतुल प्रताप पर भ्रष्टाचार जांच तेज शासन की हाई प्रोफाइल टीम ने विकास भवन में डाला डेरा
हरिद्वार 25 जून 2026
उत्तराखंड के पंचायती राज विभाग से आज की सबसे बड़ी खबर हरिद्वार से सामने आई है जहां विकास भवन स्थित जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब देहरादून मुख्यालय से पहुंची शासन की हाई प्रोफाइल जांच समिति ने जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप के खिलाफ गंभीर शिकायतों की जांच शुरू कर दी।
सुबह 10 बजे से शुरू हुई इस मैराथन जांच में अधिकारी कार्यालय की फाइलों से लेकर वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक फैसलों तक हर पहलू को खंगाला गया। यह कार्रवाई शासन को मिली भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं की शिकायतों के बाद की जा रही है जिसने पूरे पंचायती राज महकमे में सनसनी फैला दी है।
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्य शिकायतकर्ता सुशील त्यागी और प्रदीप चौधरी सीधे जांच समिति के सामने पेश हुए और अपने साथ लाए दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों को समिति के सामने रखा। सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ताओं द्वारा पेश किए गए सबूत इतने मजबूत बताए जा रहे हैं कि आरोपी अधिकारी की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही हैं।
जानकारी के अनुसार 22 अप्रैल 2026 को डीपीआरओ अतुल प्रताप के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर विस्तृत शपथ पत्र शासन को सौंपा गया था। इसके बाद शासन ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए 9 अलग अलग बिंदुओं पर जांच के आदेश जारी किए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तराखंड शासन ने तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति बनाई जिसमें संयुक्त सचिव पंचायतीराज ध्रुव मोहन सिंह राणा को अध्यक्ष बनाया गया जबकि संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ त्रिपाठी और मुख्य वित्त अधिकारी शशि सिंह को सदस्य बनाया गया। तीनों वरिष्ठ अधिकारी खुद हरिद्वार पहुंचकर जांच की कमान संभालते नजर आए।
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई फाइलों में गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। जांच अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति लागू होगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
24 जून को जारी आधिकारिक आदेश के बाद आज हुई इस हाई प्रोफाइल जांच ने हरिद्वार से लेकर देहरादून तक प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर है क्योंकि माना जा रहा है कि रिपोर्ट सौंपते ही संबंधित अधिकारी पर बड़ी विभागीय कार्रवाई या निलंबन की गाज गिर सकती है।








