अस्पताल की बदहाली देख डीएम डॉ आशीष चौहान का चढ़ा पारा, रात के निरीक्षण ने लापरवाह सिस्टम की खोल दी परतें”

SHARE:

प्रशासनिक सिस्टम में अक्सर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि अधिकारी दफ्तरों तक सीमित रह जाते हैं और जमीनी हकीकत फाइलों में दबकर रह जाती है। लेकिन देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में देर रात जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान के औचक निरीक्षण ने यह दिखा दिया कि जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी सिर्फ आदेश नहीं देते, बल्कि हालात को खुद जाकर परखते भी हैं।

रात के समय अचानक अस्पताल पहुंचकर डीएम ने व्यवस्थाओं की हकीकत देखी तो कई गंभीर खामियां सामने आ गईं। आईसीयू में एसी बंद, वार्डों में गंदगी, अधूरे रिकॉर्ड और मरीजों की अनदेखी जैसी तस्वीरें साफ बता रही थीं कि सिस्टम कहीं न कहीं सुस्त पड़ा हुआ है। लेकिन फर्क यहां दिखा कि इस बार निरीक्षण सिर्फ खानापूर्ति नहीं था, बल्कि हर कमी पर तुरंत जवाबदेही तय करने की सख्ती भी नजर आई।

सबसे अहम बात यह रही कि निरीक्षण के दौरान डीएम चौहान ने सिर्फ व्यवस्था नहीं देखी, बल्कि मरीजों की स्थिति को भी बारीकी से समझा। एक गंभीर हालत में पड़े मरीज की हालत को तुरंत भांपते हुए मौके पर इलाज शुरू करवाना यह बताता है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता आखिर होती क्या है। हर अधिकारी कुर्सी संभाल सकता है, लेकिन जनता की तकलीफ को मौके पर महसूस कर तुरंत निर्णय लेना अलग बात होती है।

कहा जाता है कि सिस्टम तभी सुधरता है जब नेतृत्व मजबूत हो। देहरादून में यह तस्वीर साफ दिखाई दी कि मुख्यमंत्री धामी जिस जवाबदेह प्रशासन की बात करते हैं, उसे जमीन पर लागू करने वाले अधिकारी भी उसी गंभीरता के साथ काम कर रहे हैं।

साफ है कि देहरादून को ऐसा जिलाधिकारी मिला है जो सिर्फ बैठकों और रिपोर्टों पर भरोसा नहीं करता, बल्कि खुद मौके पर पहुंचकर व्यवस्था की नब्ज टटोलता है। और यही प्रशासन की असली ताकत है,जिम्मेदारी, जवाबदेही और जनता के प्रति संवेदनशीलता। यही वजह है कि ऐसे अधिकारी सिस्टम में भरोसा भी पैदा करते हैं और संदेश भी देते हैं कि लापरवाही अब ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकती।

Khushi
Author: Khushi

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई