सेवा, सुरक्षा और समर्पण की मिसाल बना SDRF, सेनानायक अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में कांवड़ यात्रा में मानवता का सबसे मजबूत चेहरा
हरिद्वार। कांवड़ यात्रा-2026 केवल आस्था का महापर्व नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा की सबसे बड़ी परीक्षा भी है। इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) जिस समर्पण और दक्षता के साथ निभा रहा है, वह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन गया है। सेनानायक अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में SDRF ने यह साबित किया है कि वर्दी केवल कानून-व्यवस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और मानवता का भी सबसे मजबूत चेहरा है।
हरिद्वार के शंकराचार्य चौक पर आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर इसी सोच का सशक्त प्रमाण है। जहां एक ओर SDRF की टीमें गंगा घाटों, संवेदनशील स्थानों और ड्यूटी प्वाइंट्स पर चौबीसों घंटे मुस्तैद रहकर दुर्घटनाओं और आपदाओं से श्रद्धालुओं की रक्षा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर अस्वस्थ, थके हुए और जरूरतमंद कांवड़ियों को निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराकर सेवा का नया अध्याय भी लिख रही हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान SDRF ने केवल राहत और बचाव तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी। अब तक लगभग 30 कांवड़ियों की जान बचाकर बल ने यह संदेश दिया है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। जलधाराओं में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, बेहोश और घायल श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर से अस्पताल या स्वास्थ्य शिविर तक पहुंचाना, लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलाना और हर आपात स्थिति में सबसे पहले मौके पर पहुंचना—SDRF की कार्यशैली को विशिष्ट बनाता है।
सेनानायक अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने SDRF को केवल एक रेस्क्यू फोर्स नहीं, बल्कि जनसेवा के लिए समर्पित मानवीय संगठन के रूप में स्थापित किया है। उनकी स्पष्ट सोच है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि चिकित्सा शिविर जैसी पहल को भी उतनी ही गंभीरता से संचालित किया जा रहा है, जितनी किसी बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन को।
SDRF की कार्यशैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट संगम है। उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से लेकर चारधाम यात्रा, मानसून आपदाओं और कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजनों तक, हर चुनौती में यह बल अपनी पेशेवर क्षमता का परिचय देता रहा है। आज SDRF केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश की सबसे सक्षम और भरोसेमंद आपदा राहत इकाइयों में अपनी पहचान बना चुका है।
शंकराचार्य चौक पर आयोजित चिकित्सा शिविर में सहायक सेनानायक सुशील रावत, निरीक्षक कविन्द्र सजवाण, सब इंस्पेक्टर आशीष त्यागी, सुरेंद्र सिंह, फार्मासिस्ट नरेंद्र पंवार सहित पूरी टीम ने श्रद्धालुओं की सेवा में पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्व निभाए। यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव सेवा की ऐसी पहल है जिसने हजारों श्रद्धालुओं को राहत और विश्वास प्रदान किया।
सेनानायक अर्पण यदुवंशी का स्पष्ट संदेश है कि कांवड़ यात्रा में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, स्वस्थ और संतुष्ट होकर अपने गंतव्य तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से SDRF की टीमें हर समय तैयार हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत, चिकित्सा सहायता और रेस्क्यू उपलब्ध करा रही हैं।
कांवड़ यात्रा-2026 में SDRF का यह समर्पण इस बात का प्रमाण है कि जब नेतृत्व दूरदर्शी हो और टीम सेवा की भावना से प्रेरित हो, तब सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं रहती, बल्कि विश्वास का आधार बन जाती है। उत्तराखंड की जनता और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए SDRF आज भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है, और सेनानायक अर्पण यदुवंशी के नेतृत्व में यह बल सेवा, साहस और समर्पण की नई मिसाल कायम कर रहा है।








