धामी-बंसल की जोड़ी का बुलडोजर चला बेखौफ: आस्था की आड़ में अवैध कब्जेवालों की अब नहीं चलेगी दुकान!

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धामी का धाकड़ बुलडोजर: आस्था की आड़ में अवैध कब्जेवालों की दुकान अब बंद!

जब इरादे साफ हों और प्रशासनिक मशीनरी सतर्क, तो कोई भी अवैध कब्जा टिक नहीं सकता—चाहे उसके चारों ओर चमत्कारों की कहानियां क्यों न बुनी गई हों। देहरादून के बीचोंबीच सरकारी अस्पताल की ज़मीन पर अवैध रूप से बनाई गई मजार की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी—धार्मिक आस्था की आड़ में सालों से पलते एक अतिक्रमण की परछाई, जो न केवल अस्पताल प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी हुई थी, बल्कि आमजन की भावना से भी खेल रही थी।

लेकिन इस बार मामला यूं ही दफ्न नहीं हुआ। ऋषिकेश निवासी पंकज गुप्ता की ओर से सीएम पोर्टल पर की गई एक साधारण-सी शिकायत ने पूरे प्रशासन को झकझोर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह स्पष्ट था कि चाहे कोई भी हो—कब्जा करने वालों के लिए अब कोई राहत नहीं बची।

इस पूरे अभियान में जो चेहरा सबसे मजबूत और निर्णायक रूप में सामने आया, वह था देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल का।

डीएम सविन बंसल ने न केवल इस मामले को गंभीरता से लिया, बल्कि हर विभाग को समयबद्ध और पारदर्शी जांच के निर्देश दिए। राजस्व विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, दून अस्पताल प्रशासन—सभी को एक छत के नीचे लाकर सटीक तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की। जांच के बाद जब यह स्पष्ट हुआ कि मजार न केवल अवैध थी, बल्कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई थी, तो डीएम बंसल ने किसी भी दबाव को दरकिनार करते हुए पूरी प्रशासनिक टीम को रातोंरात सक्रिय कर दिया।

रात के अंधेरे में जब शहर सो रहा था, तब सविन बंसल की अगुवाई में प्रशासन जाग रहा था—न केवल ज़मीन को मुक्त कराने के लिए, बल्कि यह संदेश देने के लिए कि अब उत्तराखंड में न आस्था की आड़ में कब्जा चलेगा, न ही व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकी जा सकेगी।

मुख्यमंत्री धामी के बुलडोजर अभियान में जिलाधिकारी सविन बंसल की यह निर्णायक भूमिका, यही बताती है कि जब नेता और अफसर एक ही सोच से चलें, तो व्यवस्था में करिश्मा नहीं, बदलाव आता है।

अब उस मजार का नामोनिशान मिट चुका है, और उसके साथ मिट चुकी हैं वे धूर्त कहानियां, जो आस्था को अपनी ढाल बनाकर जनता को गुमराह करती थीं।
धामी और बंसल की जोड़ी ने साफ कर दिया है—सरकारी जमीन पर अब कोई कब्जा नहीं करेगा, चाहे उसके चारों ओर कितनी ही चादरें क्यों न बिछा दी जाएं।

Khushi
Author: Khushi

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