
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इस अधिनियम के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 30 का उल्लंघन करता है।
*मुख्य मुद्दे:*
– *वक्फ बाय यूजर*: अधिनियम में वक्फ बाय यूजर की संपत्तियों को वक्फ के रूप में घोषित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि वक्फ बाय यूजर के लिए पंजीकरण आवश्यक नहीं था और इसे हटाने से समस्या हो सकती है।
– *वक्फ बोर्ड की संरचना*: याचिकाकर्ताओं ने वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि पदेन सदस्यों के अलावा केवल मुसलमानों को ही इन निकायों का प्रबंधन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
– *कलेक्टर की जांच*: अधिनियम में एक प्रावधान है जिसमें कहा गया है कि यदि कलेक्टर जांच करता है कि कोई संपत्ति सरकारी भूमि है या नहीं, तो ऐसी संपत्ति को जांच के दौरान वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।
*सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:*
– सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून के लिए संवैधानिकता की धारणा होती है और जब तक कोई स्पष्ट मामला नहीं बनता है, तब तक अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं।
– सीजेआई ने पूछा कि क्या वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने से धर्म का पालन करने पर रोक लग जाती है?
*केरल सरकार का विरोध:*
– केरल सरकार ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम का विरोध करने का फैसला किया है और सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने के लिए एक याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।
*वक्फ की संपत्तियों का महत्व:*
– भारत में वक्फ की कुल संपत्ति 8.72 लाख एकड़ है, जिसकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है। यह संपत्ति सेना और रेलवे के बाद वक्फ के पास सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी है¹।








