“अमित शाह के बयान पर सियासत गर्म, विपक्ष ने की आलोचना”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक पुस्तक विमोचन समारोह में कहा कि भारत में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्मिंदगी महसूस होगी, क्योंकि हमारी भाषाएं हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषाओं के माध्यम से भारत की कल्पना नहीं की जा सकती और हमारी भाषाओं को वरीयता मिलनी चाहिए।
अमित शाह के बयान के मुख्य बिंदु:
– *भारतीय भाषाओं का महत्व*: अमित शाह ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी संस्कृति और पहचान का केंद्र हैं।
– *विदेशी भाषाओं की सीमाएं*: उन्होंने कहा कि विदेशी भाषाओं में हमारे इतिहास, संस्कृति और धर्म को नहीं समझा जा सकता।
– *अंग्रेजी बोलने पर शर्मिंदगी*: शाह ने भविष्यवाणी की कि भारत में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्मिंदगी महसूस होगी, क्योंकि हमारी भाषाएं हमारी पहचान का अटूट हिस्सा हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
– *राहुल गांधी*: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि अंग्रेजी एक पुल है, जो हमें दुनिया से जोड़ती है और आत्मविश्वास बढ़ाती है।
– *सागरिका घोष*: तृणमूल कांग्रेस की नेता सागरिका घोष ने कहा कि अंग्रेजी एक संपर्क भाषा है, जो हमें दुनियाभर में फायदा पहुंचाती है और लाखों लोग अंग्रेजी के ज्ञान की मांग करते हैं।
– *केरल के शिक्षा मंत्री आर बिंदु*: उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह अंग्रेजी के खिलाफ बोलकर हिंदी थोपने की कोशिश कर रहे हैं।
भाषा विवाद:
अमित शाह के बयान ने भाषा विवाद को फिर से हवा दे दी है। कुछ लोगों का मानना है कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना जरूरी है, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि अंग्रेजी एक उपयोगी भाषा है, जो हमें दुनिया से जोड़ती है और रोजगार के अवसर प्रदान करती है।

Khushi
Author: Khushi

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