“बीमित ऋण के बावजूद विधवा को सताने वाला बैंक आया डीएम के रडार पर, 6.50 लाख की आरसी जारी – कभी भी हो सकती है शाखा सील”

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तेज तर्रार जिलाधिकारी सविन बंसल का नाम अब केवल प्रशासनिक कार्यशैली के लिए ही नहीं, बल्कि जनहित में उठाए गए प्रचंड निर्णयों के लिए भी लिया जा रहा है। जब बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां विधवा महिला की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही थीं, तब डीएम ने आंखों पर पट्टी नहीं बांधी, आरसी की कलम उठाई और सीधे खेल पर चोट कर दी।

अब तक बैंक के बाहर लिखा होता था – “आपका हित हमारे लिए सर्वोपरि”, लेकिन जब विधवा प्रिया न्याय के लिए भटकती रही, तो यही हित ‘हिसाब’ में बदल गया। बैंक ने मानो कह दिया – बीमा तो है, लेकिन भाव नहीं!

इंश्योरेंस कंपनी और बैंक की जोड़ी मानो ‘वित्तीय महाभारत’ में शकुनि का रोल निभा रही थी, जहाँ सब नियमों के बावजूद विधवा और उसकी चार बेटियों को न्याय नहीं मिल रहा था। मगर क्या करें, जब धृतराष्ट्र की आंखें बंद हों, तो भीष्म को ही कुरुक्षेत्र में उतरना पड़ता है — और इस बार वो भीष्म हैं जिलाधिकारी सविन बंसल।

आरसी का वार, सीधे 6.50 लाख पर — कोई मज़ाक नहीं है। यह एक सख़्त संदेश है उन सभी वित्तीय संस्थानों के लिए जो आम जनमानस को काग़ज़ों के मकड़जाल में उलझा कर उनकी पीड़ा को “फ़ॉर्मलिटी” बना देते हैं।

जब बैंक वालों को बीमा प्रीमियम चाहिए होता है, तब ग्राहक की जान-पहचान सब कुछ परखी जाती है; पर जब क्लेम का वक्त आता है तो याद आ जाता है – “कुछ शर्तें लागू”

जैसे पहले शिवानी प्रकरण में देखा गया, वैसे ही अब प्रिया के मामले में भी प्रशासन की गदा ने सीधे प्रहार किया है। अब बैंक सील होने की कगार पर है और इंश्योरेंस कंपनी की कथनी-करनी में फर्क उजागर हो चुका है।

यह कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं, हकीकत है उस व्यवस्था की जिसमें गरीब को बीमा तो बेचा जाता है पर भरोसा नहीं दिया जाता।

ध्यान रहे — ये वही उत्तराखंड है जहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली से प्रेरित प्रशासनिक मशीनरी अब “जनसेवा नहीं तो बर्दाश्त नहीं” के सिद्धांत पर चल रही है।

अब यह साफ़ संदेश है —

“जनमानस को उलझाने वालों के लिए प्रशासन के पास अब केवल चेतावनी नहीं, एक्शन प्लान भी है।”

और जो प्रिया की तरह न्याय की आस लगाए बैठे हैं – अब उन्हें राह दिखाने वाला जिला प्रशासन है, जो न किसी का गिरवी है, न किसी से डरता है।

यह बदलाव है… यह चेतावनी है… और यह वो नवयुग की प्रशासनिक भाषा है –
जहाँ बैंक अगर लोन के साथ धोखा करेगा तो आरसी और सीलिंग का नोटिस गिफ्ट में मिलेगा!

Khushi
Author: Khushi

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