
उत्तराखंड के छात्रसंघ चुनावों ने राजनीति की हवा ही बदल दी है। महीनों से विपक्ष और कुछ संगठन यह प्रचार कर रहे थे कि युवा नाराज़ हैं, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं से उनका भरोसा टूट चुका है। लेकिन ABVP ने छात्रों के वोट से इस धारणा को सिरे से उलट कर रख दिया। प्रदेश के 100 से अधिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भगवा परचम इस तरह फहराया गया कि विपक्ष का “नाराज़ युवा” का नैरेटिव वहीं धराशायी हो गया।
ABVP की यह जीत केवल संगठनात्मक शक्ति या चुनावी रणनीति का परिणाम नहीं है। यह साफ संकेत है कि Gen-Z युवाओं ने सीएम धामी की सोच और उनके नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, नकल विरोधी कानून और तकनीकी निगरानी जैसे ठोस कदमों ने छात्रों को संदेश दिया कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनती है और समाधान के लिए काम कर रही है।
टुकड़े-टुकड़े गैंग और वसूली मोर्चा जैसी राजनीति करने वाली ताकतों के लिए यह करारा तमाचा है। जिन्हें उम्मीद थी कि छात्र उनके आंदोलन और नारों से प्रभावित होंगे, उन्होंने वोट की चोट से साफ कर दिया कि उन्हें भाषणबाज़ी नहीं, बल्कि काम दिखाने वाले नेता चाहिए। ABVP ने चुनाव में सूपड़ा साफ कर दिया और स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड के कॉलेज-कैंपस में भगवा ही भगवा है।
यह जीत यह भी दर्शाती है कि विपक्ष का शोर और सोशल मीडिया का प्रचार सभी वास्तविकता को बदल नहीं सकता। छात्रसंघ चुनाव के नतीजे यह साबित करते हैं कि युवा वर्ग अब केवल नाराज़गी का एजेंडा नहीं अपनाता, बल्कि भरोसा और ठोस नीतियों पर प्रतिक्रिया देता है। ABVP की ऐतिहासिक सफलता और सीएम धामी की युवा सोच को मिली मुहर प्रदेश की राजनीति में एक सशक्त संदेश है—काम करो, विश्वास पाओ, और जनता खुद मुहर लगा देगी।








