
उत्तराखंड के छात्रसंघ चुनावों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि युवा वर्ग केवल नाराज़गी के एजेंडे से प्रभावित नहीं होता, बल्कि उसे भरोसा और ठोस काम चाहिए। ABVP की ऐतिहासिक जीत इस बात का सबूत है कि छात्र केवल पोस्टर और नारे नहीं देखते, बल्कि सरकार की नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर ध्यान देते हैं।
मुख्यमंत्री धामी की युवा-केंद्रित सोच और कठोर नकल विरोधी कानून ने छात्रों में भरोसा पैदा किया। अब युवाओं को यह संदेश साफ है—“सरकार केवल बातें नहीं कर रही, काम कर रही है।” और जब इसी भरोसे के साथ 25,000 से अधिक सरकारी नौकरियों का रास्ता साफ किया गया, तो छात्र संगठन ABVP को मिलने वाला व्यापक समर्थन स्वाभाविक ही था। यह जीत महज चुनावी रणनीति या संगठन की ताकत का परिणाम नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास का प्रतीक है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ #UttarakhandYuvaWithDhami दर्शाता है कि Gen-Z ने भी स्पष्ट कर दिया कि उन्हें भाषणबाज़ी, ड्रामा और नकल माफियाओं के बहाने का शोर नहीं, बल्कि ईमानदार और पारदर्शी नेतृत्व चाहिए। टुकड़े-टुकड़े गैंग और वसूली मोर्चा जैसे समूहों के लिए यह नतीजे एक करारा तंज हैं—वो सोचते थे कि सोशल मीडिया पोस्ट और विरोध प्रदर्शन से छात्रों को घेर लिया जाएगा, लेकिन युवाओं ने वोट की ताकत से साफ़ कर दिया कि काम दिखाओ, विश्वास पाओ।
ABVP की जीत दरअसल युवाओं की आकांक्षाओं, उनकी मेहनत और उनके भविष्य के लिए किए गए भरोसे का प्रतिबिंब है। छात्रसंघ चुनाव के नतीजे यह भी दिखाते हैं कि उत्तराखंड का युवा अब सिर्फ नाराज़गी या शोर सुनकर निर्णय नहीं लेता; वह अपने भविष्य, रोजगार और पारदर्शिता के आधार पर अपने नेता को मुहर लगाता है। और इस बार धामी सरकार ने यह भरोसा जीतकर यह साबित कर दिया कि भगवा केवल झंडे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि युवाओं के विश्वास में भी चमकता है।








