
विराट कोहली अब टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज़ी करते नहीं दिखेंगे—यह सोच ही मन को भारी कर देती है। एक ऐसा किरदार, जिसने लाल गेंद को अपना जुनून बनाया, जो हर टेस्ट मैच में देश की गरिमा के लिए लड़ा, अब मैदान से दूर हो गया है।
हर सुबह जब विराट क्रीज़ पर होते थे, तो उम्मीद होती थी कि कुछ खास होगा। जब वे हेलमेट उतारकर शतक के बाद बल्ला उठाते थे, तो केवल रन नहीं, जज़्बा दिखता था। उनका हर शतक, हर संघर्ष, हर चीख—टेस्ट क्रिकेट को ज़िंदा रखने की एक कोशिश थी।
पिछली कुछ टेस्ट पारियां भले ही खामोश रहीं, लेकिन विराट का सफर कभी आंकड़ों से परिभाषित नहीं रहा। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी भावनाएं—खेल के प्रति, टीम के प्रति और भारत के प्रति। उनका आउट होना सिर्फ एक विकेट का गिरना नहीं होता था, बल्कि करोड़ों दिलों का धड़कना थमता था।
आज जब वे इस मंच से विदा ले रहे हैं, तो ये सिर्फ एक खिलाड़ी का संन्यास नहीं, एक युग की विदाई है। ड्रेसिंग रूम की वह गूंजती हुई आवाज़ अब नहीं सुनाई देगी, जो हर युवा खिलाड़ी में जोश भर देती थी।
विराट ने हमें सिखाया कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ एक फॉर्मेट नहीं, बल्कि एक जुनून है। अब जब वह नहीं होंगे, तो मैदान थोड़ा सूना लगेगा, और हमारी आंखें उस नंबर 18 को तलाशेंगी जो हमेशा सीना ठोककर कहता था—“मैं हूँ विराट कोहली।”
धन्यवाद, विराट। टेस्ट क्रिकेट के रोमांच को ज़िंदा रखने के लिए।








