धामी की जीरो टॉलरेंस नीति का डंडा – रिश्वतखोर चौकी प्रभारी रंगेहाथ गिरफ्तार

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“धामी की जीरो टॉलरेंस नीति: रिश्वतखोर चौकी प्रभारी की गिरफ्तारी से कांपे ‘काली कमाई’ के पहरेदार”

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जब एक सब-इंस्पेक्टर रिश्वत की रकम गिन ही रहा था, तभी धामी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ की तलवार झपट्टा मार चुकी थी। पटेलनगर थाना क्षेत्र के आईएसबीटी चौकी प्रभारी देवेन्द्र खुगशाल को जैसे ही एक लाख रुपये की रिश्वत मिली, वैसे ही सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने ‘बंद मुट्ठी’ से नोट नहीं, बल्कि उसकी गर्दन पकड़ी।

अब ज़रा सोचिए, जिस पुलिस चौकी से न्याय की उम्मीद होती है, वहां अगर ‘प्रभारी’ ही ‘दलाली’ पर उतर आए, तो फिर जनता कहाँ जाए? लेकिन शुक्र है कि धामी सरकार की 1064 टोल-फ्री विजिलेंस सेवा अब जनता के लिए सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि ‘न्याय की डायल टोन’ बन चुकी है।

इस पूरे घटनाक्रम में जो बात सबसे बड़ी और काबिल-ए-गौर है, वह ये कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सिर्फ भाषण नहीं देते, एक्शन में विश्वास करते हैं। ‘भ्रष्टाचार नहीं सहेंगे, किसी को नहीं बख्शेंगे’ – ये नारा अब उत्तराखंड की प्रशासनिक गलियों में ‘कभी भी और कहीं भी’ की सच्चाई बन चुका है।

पुलिस विभाग, जिसे कानून का रक्षक कहा जाता है, अगर वहीं से रिश्वत का अजगर फुफकारने लगे, तो ये साहसी निर्णय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री धामी ने ये साफ कर दिया है कि चाहे वर्दी में हो या कुर्सी पर, अगर भ्रष्टाचार करेगा तो सीधा जेल की चाय पिएगा।

धामी का यह एक्शन उस राजनीतिक दौर में आता है जब कई राज्यों में भ्रष्ट अधिकारियों को ‘ट्रांसफर’ देकर ‘इनाम’ दिया जाता है। लेकिन उत्तराखंड में ट्रांसफर नहीं, टॉर्च और हथकड़ी मिल रही है – और यही फर्क है ‘संकल्प’ और ‘सांठगांठ’ की राजनीति में।

पिछले तीन वर्षों में 150 से ज्यादा अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेजकर धामी ने साफ संकेत दे दिया है –
“ये उत्तराखंड है, यहां वर्दी वाले भी वर्दी संभालें वरना सलाखें उनका इंतज़ार कर रही हैं।”
ये मामला न सिर्फ पुलिस व्यवस्था में छुपे भ्रष्टाचार की परतें खोलता है, बल्कि ये भी सिद्ध करता है कि जब नेतृत्व ईमानदार और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला होता है, तब व्यवस्थाएं सुधरने लगती हैं। पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस नीति केवल कागजों पर नहीं, बल्कि हर रिश्वतखोर की नींद उड़ाने वाली हकीकत बन चुकी है। अब सवाल ये है – अगला नंबर किसका?

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Khushi
Author: Khushi

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