
उत्तराखंड के चंपावत जिले में लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी का अजीबोगरीब आदेश चर्चा में है। अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि कार्यालय में एक अपर सहायक अभियंता की सेवा पुस्तिका गायब हो गई है, और इसे ढूंढने के लिए सभी कर्मचारियों को अपने घर से दो मुट्ठी चावल लाने होंगे। इन चावलों को मंदिर में अर्पित कर देवी-देवताओं से समाधान की याचना की जाएगी। हालांकि, अधिशासी अभियंता ने आदेश को फर्जी बताते हुए जांच की बात कही है।
मुख्य बिंदु:
– कार्यालय आदेश: लोक निर्माण विभाग के एनएच खंड लोहाघाट कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि अपर सहायक अभियंता जय प्रकाश की सेवा पुस्तिका गायब हो गई है।
– चावल लाने का आदेश: आदेश में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को 17 मई को अपने घर से दो मुट्ठी चावल लाकर कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया था।
– दैवीय न्याय: अधिशासी अभियंता का मानना है कि ऐसा करने से देवता मानसिक रूप से परेशान अपर सहायक अभियंता के साथ न्याय करेंगे।
– शासन का एक्शन: मामले को शासन ने गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय ने संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। प्रमुख अभियंता कार्यालय ने स्पष्टीकरण को लेकर आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि आशुतोष कुमार को 3 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना होगा¹ ²।

उत्तराखंड में वायरल हो रहे लोक निर्माण विभाग के एक पत्र ने सभी को हैरत में डाल दिया है. लोक निर्माण विभाग के नाम से कार्यालय आदेश के रूप में वायरल हुआ यह पत्र लोहाघाट अधिशासी अभियंता के कार्यालय का दिखाया गया है. जिसमें लिखा गया है कि कार्यालय के ही एक अपर सहायक अभियंता की सर्विस बुक गायब हो गई है और इसका कहीं भी पता नहीं चल पा रहा है. ऐसे में कर्मचारियों को आदेशित करते हुए इस पत्र में लिखा गया है कि सभी कर्मचारी अपने घर से दो मुट्ठी चावल लेकर आएं. ताकि इन्हें मंदिर में डाला जा सके और इसके बाद इस प्रकरण पर देवता ही न्याय करेंगे.
सरकारी सिस्टम में दैवीय आस्था के नाम पर इस तरह कर्मचारियों से ‘दो मुट्ठी चावल’ मंगाने का यह मामला खूब सुर्खियों में रहा और ईटीवी भारत ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाते हुए मामले की गंभीरता को भी जाहिर करने की कोशिश की. प्रकरण पर ईटीवी भारत ने पत्र में अधिशासी अभियंता के रूप में आशुतोष कुमार वाले हस्ताक्षर को पाया और इसके बाद उनसे बातचीत भी की जिसमें उन्होंने इस पत्र को अपना होने से इनकार तो किया लेकिन यह भी माना कि उनके यहां अभियंता की सर्विस बुक गायब हुई है और तमाम कर्मचारियों ने उन्हें दैवीय आस्था के तहत न्याय करने का प्रस्ताव दिया था








