
जब अफसरशाही की फील्ड पर खिलाड़ी की तरह कोई उतरता है, तो नतीजा सिर्फ फाइलों में नहीं, ज़मीन पर दिखता है। देहरादून के डीएम सविन बंसल अब सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी नहीं, एक ऑलराउंडर बनकर उभरे हैं। कभी तेज़ गेंदबाज़ की तरह कड़े फैसले लेते हैं, तो कभी बल्लेबाज़ की तरह जनता की उम्मीदों को बाउंड्री पार पहुंचा देते हैं। और जब फील्डिंग की बात आती है, तो खुद सड़कों पर उतर कर मॉनिटरिंग करते हैं—हर एंगल से चौकस।
शराब की दुकानों को लेकर जो फैसला आया है, वह सिर्फ एक आदेश नहीं, एक संदेश है—जनसुरक्षा सबसे ऊपर। ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों की मुख्य वजहों में शामिल दुकानों को चिन्हित करना, फिर बिना देरी आदेश जारी करना, ये बताता है कि डीएम बंसल वक्त गंवाने वालों में नहीं हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि शहर की सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियों का नहीं, नियमों का राज चलेगा।
ऑलराउंडर की खास बात यही होती है कि वह हर मोर्चे पर एक्टिव होता है। विद्युत पोल शिफ्टिंग से लेकर डिवाइडर निर्माण तक, ट्रैफिक बॉटलनेक्स हटाने से लेकर स्लीप वे तैयार करने तक—हर जगह सविन बंसल की सीधी निगरानी है। न कोई बहाना, न कोई फाइलों की लेटलतीफी। हर चीज़ समयबद्ध और असरदार।
डीएम की इस पारी में खास बात ये है कि वो सिर्फ समस्याओं को चिन्हित नहीं कर रहे, बल्कि उनका समाधान भी उसी जोश से कर रहे हैं। यही वजह है कि सड़क सुरक्षा समिति अब महज़ औपचारिकता नहीं, एक प्रभावी इकाई बन चुकी है, जो जनहित में लगातार बड़े फैसले ले रही है।
राजनीतिक संतुलन, प्रशासनिक दृढ़ता और मानवीय संवेदना—तीनों का मेल अगर किसी एक अफसर में दिखे, तो वो सविन बंसल हैं। न कोई शोर, न दिखावा—सिर्फ काम, और वो भी ज़मीनी स्तर पर।
वक्त आ गया है जब नौकरशाही को सिर्फ कुर्सी तक सीमित नहीं, एक्शन में देखा जाए। और डीएम बंसल इस सोच के सबसे सशक्त उदाहरण बन चुके हैं। देहरादून को अब बस एक स्मार्ट सिटी नहीं, एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित शहर बनाना है—और इस मिशन के ऑलराउंडर कप्तान के रूप में सविन बंसल क्रीज पर डटे हुए हैं, पूरी मजबूती के साथ।








