
उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले आशुतोष आज आईएमए से पास आउट हो गये हैं. बेटे आशुतोष की कामयाबी से परिजन बेहद खुश हैं. आशुतोष अपने परिवार के ऐसे पहले सदस्य हैं जो सेना में अफसर के तौर पर शामिल हो रहे हैं. जिसके कारण परिवार की खुशियां दोगुनी हो गई हैं. आशुतोष को इस कामयाबी तक पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी, जिसके बाद आज उन्होंने परिवार को गर्व के पल दिये हैं.
असफलता ही सफलता की पहली सीढी मानी जाती है. भारतीय सैन्य अकादमी आने वाले प्रत्येक जैंटलमैन कैडेट को यहां तक पहुंचने में कई तरह की चुनौती और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.. इसमें कई ऐसे भी थे जिन्हें कई बार असफलताओं का मुंह भी देखना पड़ा . उत्तर प्रदेश हरदोई के रहने वाले आशुतोष सिंह भी इन्हीं में से एक हैं. आशुतोष ने अपने पांचवें अटेम्प्ट में सफलता हासिल की. इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी में करीब 1 साल का प्रशिक्षण हासिल किया।हरदोई के रहने वाले आशुतोष सिंह टेक्निकल एंट्री स्कीम के जरिए सेना का हिस्सा बने हैं. इस दौरान उन्होंने ऐसे कई कठिन क्षणों को भी देखा जो उनकी असफलताओं से भरे हुए थे. एक समय ऐसा भी आया जब लगातार उन्हें असफलता के कारण कुछ मायूसी का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लेफ्टिनेंट आशुतोष सिंह कहते हैं उन्होंने पहले ही यह सोच लिया था की सेना में अफसर बनकर ही घर जाना है. ऐसे में चाहे कितना समय लगे वह प्रयास करते रहेंगे.
वैसे तो आशुतोष सिंह बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन सेना में बतौर अफसर भर्ती होने के लिए तैयारी के दौरान खराब स्थितियों से भी गुजरना पड़ा. उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं रहा तो भी उन्होंने राह नहीं छोड़ी. प्रयास जारी रहा और लक्ष्य को हासिल भी कर लिया गया. लेफ्टिनेंट आशुतोष सिंह के पिता आलोक सिंह कहते हैं कि जब आशुतोष असफल हो रहे थे तो उन्हें भी एक बार इस बात की चिंता होने लगी थी लेकिन उन्हें विश्वास था कि उनका बेटा इतनी आसानी से नहीं हारेगा. इसी तरह आशुतोष की मां संगीता सिंह भी बेटे के संघर्ष को यादज कर रोने लगती हैं. वह कहती हैं उन्हें पता था कि उनका बेटा कुछ तो करेगा.।








