
पौड़ी गढ़वाल को नया कप्तान मिला है — और वह भी ऐसा जो “कमांड” को सिर्फ आदेश नहीं, बल्कि जवाबदेही समझता है। आईपीएस सर्वेश पंवार, जिनकी पहचान पुलिसिंग के “प्रोटोकॉल” से ज़्यादा “पब्लिक कनेक्ट” से बनी है, अब गढ़वाल की कानून व्यवस्था के नए सूत्रधार हैं।
2019 बैच के इस अधिकारी का नाम सुनते ही पुलिस विभाग के लोग “डंडा” नहीं, “दिशा” याद करते हैं। देहरादून में अपराध से लेकर यातायात तक उन्होंने ऐसा सिस्टम खड़ा किया कि फाइलें कम और फैसले ज़्यादा चलते थे। चमोली में रहते हुए जब जनता फोन करती थी, तो कॉल सिर्फ ट्रांसफर नहीं होती थी, समाधान भी ट्रांसफर हो जाता था।
अब वही सर्वेश पंवार पौड़ी में हैं — और पौड़ी पुलिस को नया विजन मिला है, “सुरक्षित, अनुशासित, पारदर्शी और जनसेवा केंद्रित पुलिसिंग।” यह चार शब्द सुनने में जितने सरल लगते हैं, अमल में उतने कठिन, लेकिन यह वही अधिकारी हैं जो “असंभव” शब्द को नाकारा साबित करते आए हैं।
सकारात्मक तंज ये कि — अगर गढ़वाल के लोग अब यातायात में हेलमेट पहनने लगें, तो समझिए डर नहीं, भरोसा काम कर रहा है। और अगर थाना अब “डांट” नहीं, “संवाद” की जगह बन जाए, तो यकीन मानिए सर्वेश पंवार का असर शुरू हो गया है।
कुल मिलाकर, पौड़ी को सिर्फ एक नया एसएसपी नहीं मिला — एक ऐसी सोच मिली है जो वर्दी को सख्ती नहीं, संवेदनशीलता का प्रतीक बनाना चाहती है।








