कुर्सी पर बवाल: गलती से बैठे नीरज त्यागी निशाने पर, अहंकार में अंधे नेता बने कांग्रेस के असली संकट

SHARE:

कांग्रेस में अब गलती कुर्सी पर बैठने की नहीं, बल्कि कुर्सी पर बैठे रहने वालों की है — और यही फर्क नीरज त्यागी व बाकी छुटभैये नेताओं के बीच साफ दिखता है। नीरज त्यागी गलती से किसी बड़ी कुर्सी पर बैठ गए, पर कांग्रेस के कई नेता जानबूझकर कुर्सी पर जमे हैं — और संगठन की जड़ें खोदने का ठेका भी मानो इन्हीं को मिला हुआ है।

नीरज त्यागी ने जब महसूस किया कि वे अनजाने में किसी वरिष्ठ की कुर्सी पर बैठ गए हैं, तो उन्होंने दरी बिछाकर प्रायश्चित किया — यह उनका संस्कार है, कांग्रेस सेवा दल का अनुशासन है, गांधीवादी सोच का परिचय है। मगर सवाल यह है कि क्या कांग्रेस भवन में अब संस्कार परिहास बन गए हैं? क्या विनम्रता अब “कमज़ोरी” और चरित्र अब “ड्रामा” कहा जाएगा?

आज कांग्रेस भवन में कुर्सियों का असली झगड़ा विचारों का नहीं, अहंकार का है। नीरज त्यागी ने जिस विचारधारा की बात अपने लेख में की — वही गांधी का रास्ता है, वही कांग्रेस की आत्मा है। लेकिन जो नेता अब गांधी की जगह अपने पोस्टर चिपकाने में व्यस्त हैं, उन्हें विचारों की नहीं, प्रचार की चिंता है।

कांग्रेस के भीतर कुछ तथाकथित “वरिष्ठ” अब खुद को गांधी से भी बड़ा समझने लगे हैं — उन्हें न संगठन की परवाह है, न अनुशासन की। वे सोचते हैं कि कांग्रेस उनकी निजी जागीर है, और जो भी सच्चाई बोलेगा, उसे किनारे कर देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि नीरज त्यागी जैसे कार्यकर्ता ही कांग्रेस की वो बची-खुची आत्मा हैं, जो अब भी गांधी के चार सिद्धांतों — सत्य, सेवा, त्याग और अनुशासन — को जी रहे हैं।

त्यागी को थप्पड़ मारने की धमकी देने वाले वे लोग हैं जिनके राजनीतिक संस्कार किसी अराजक मंडली से प्रेरित लगते हैं। अगर कांग्रेस इन्हीं लोगों के भरोसे रही तो न गांधी बचेंगे, न कांग्रेस।

नीरज त्यागी की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने गलती से कुर्सी पर बैठकर भी सही रास्ते पर चलने की हिम्मत दिखाई। बाकियों की गलती यह है कि वे जानबूझकर गलत कुर्सी पर बैठे हैं — और वहीं से पार्टी को नीचे धकेल रहे हैं।

त्यागी ने कुर्सी छोड़ी, बाकियों को अब कुर्सी का मोह छोड़ना चाहिए — क्योंकि कांग्रेस को अब कुर्सी नहीं, किरदार बचाने की जरूरत है।

Khushi
Author: Khushi

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई