राज्य स्थापना दिवस पर प्रशासनिक अनुशासन की मिसाल बने सविन बंसल, पीएम ड्यूटी को बनाया मिशन अनुशासन

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देहरादून में इस बार राज्य स्थापना दिवस की तैयारी किसी समारोह से ज़्यादा एक “मिशन” बन चुकी है। और इस मिशन के कमांडर हैं जिलाधिकारी सविन बंसल — वो अधिकारी जो काम बोलता है, और जिनकी मीटिंग में “ड्यूटी” शब्द का अर्थ सिर्फ़ उपस्थिति नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी होता है।

आईआरडीटी ऑडिटोरियम में जब उन्होंने प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर अधिकारियों की ब्रीफिंग की, तो माहौल एकदम सैनिक अनुशासन जैसा था। सविन बंसल की भाषा में आदेश नहीं था, पर दृढ़ता थी; स्वर में कठोरता नहीं, पर प्रतिबद्धता थी। उन्होंने साफ कहा—“वीवीआईपी ड्यूटी में भूल-चूक के लिए कोई स्थान नहीं।” यह वाक्य जितना साधारण लगता है, उतना ही प्रशासनिक भाषा में भारी है, क्योंकि यह उन अधिकारियों के लिए एक सीधा संदेश था जो किसी भी स्तर पर लापरवाही के आदी हो चुके हैं।

तंज यह है कि बहुत जगह ब्रीफिंग “कॉफी और फाइल” तक सीमित रहती है, लेकिन देहरादून में यह “कमांड और कंट्रोल” जैसा दृश्य था। सविन बंसल ने हर अधिकारी को उसके ब्लॉक, उसकी भूमिका और उसके जवाबदेह क्षेत्र का नक्शा इस तरह समझाया जैसे कोई सेनापति अपनी चौकी तय करता है।

सकारात्मक यह है कि बंसल सिर्फ़ आदेश देने वाले अधिकारी नहीं हैं, वे अपनी टीम के हर सदस्य से संवाद बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को कोई शंका है तो समय रहते समाधान करें—यह बताता है कि वे प्रशासन को संवाद और सटीक समन्वय से चलाना जानते हैं, डर से नहीं।

यह वही सविन बंसल हैं जिनकी पहचान “रियल हीरो” के रूप में जनता पहले ही दे चुकी है, और अब राज्य स्थापना दिवस के इस भव्य आयोजन में उनकी नेतृत्व क्षमता फिर साबित हो रही है। उनकी सोच साफ़ है—व्यवस्था केवल कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर दिखनी चाहिए।

देहरादून का प्रशासन इन दिनों जिस सटीकता और अनुशासन में काम कर रहा है, वह संयोग नहीं, सविन बंसल की स्टाइल है। बाकी अफसर जहाँ ड्यूटी लिस्ट देखकर राहत की सांस लेते हैं, वहीं बंसल उसे चुनौती मानकर आगे बढ़ते हैं।

राज्य स्थापना की रजत जयंती पर पीएम मोदी का स्वागत जिस सटीकता से होगा, वह शायद लोगों को दिखे न दिखे, लेकिन हर व्यवस्था के पीछे सविन बंसल की छाप जरूर महसूस होगी—क्योंकि कुछ अधिकारी पद से नहीं, अपने कर्म से पहचान बनाते हैं।

Khushi
Author: Khushi

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