गंगा किनारे चारपाई पर सरकार, गलियों से उठी जनता, जमीन पर दिखा नेतृत्व

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सीएम पुष्कर सिंह धामी की राजनीति को अगर एक दृश्य में समेटना हो तो वह दृश्य किसी बड़े मंच, चमकती लाइटों या भारी-भरकम प्रोटोकॉल का नहीं होगा। वह दृश्य होगा,गांव की पगडंडियों से गुजरते हुए, कच्ची गलियों में चलते हुए, और आखिरकार एक खाट यानी चारपाई पर बैठकर जनता की बात सुनते हुए मुख्यमंत्री का। यही तस्वीर उन्हें परंपरागत सत्ता शैली से अलग खड़ा करती है।
हरिद्वार की चौपाल केवल एक कार्यक्रम नहीं थी, वह शासन शैली का प्रतीक थी। बिना बैरिकेड, बिना दूरी, बिना औपचारिकता,सीधा संवाद। राजनीति में अक्सर सुरक्षा घेरा और प्रोटोकॉल नेता और जनता के बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर देता है। लेकिन जब मुख्यमंत्री स्वयं खाट पर बैठते हैं, तो वह संकेत होता है कि सत्ता नीचे आई है, ज़मीन पर आई है। यह प्रतीकात्मक जरूर है, लेकिन राजनीति में प्रतीक ही संदेश बनते हैं।
गांव की चारपाई भारतीय लोकतंत्र का सबसे जीवंत मंच रही है। यहीं फैसले होते हैं, यहीं मत बनते हैं, यहीं विश्वास पैदा होता है। जब मुख्यमंत्री उसी चारपाई को अपना संवाद मंच बनाते हैं, तो वे यह स्पष्ट कर देते हैं कि वे फाइलों से नहीं, फील्ड से शासन करना चाहते हैं। यह शैली उन्हें “ऑफिस-केन्द्रित” नेता नहीं, बल्कि “मैदान-केन्द्रित” नेता की पहचान देती है।
महिलाओं का आशीर्वाद किसी भी जननेता के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संकेतक होता है। गांव की माताएं जब सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देती हैं, तो वह केवल भावनात्मक क्षण नहीं होता,वह शासन पर भरोसे का प्रमाण होता है। महिलाओं का विश्वास तभी मिलता है जब राशन समय पर मिले, पेंशन नियमित पहुंचे, बिजली-पानी की समस्या सुलझे और सुरक्षा का भाव बना रहे। यदि चौपाल में महिलाएं निर्भीक होकर अपनी बात रख रही हैं और संतोष के साथ लौट रही हैं, तो यह सुशासन का मौन प्रमाण है।
धामी की शैली का विश्लेषण करें तो तीन स्पष्ट बिंदु उभरते हैं,पहला, प्रत्यक्ष संवाद; दूसरा, त्वरित निर्देश; और तीसरा, फॉलोअप की संस्कृति। केवल सुनना पर्याप्त नहीं, मौके पर अधिकारियों को निर्देश देना और बाद में समीक्षा करना,यही प्रशासनिक मजबूती का संकेत है। सीएम हेल्पलाइन से लेकर जन चौपाल तक, एक संदेश बार-बार दोहराया जाता है कि शिकायत का समाधान कागज़ पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए।
धरातल पर जाकर निरीक्षण करना, आपदा में स्वयं मौजूद रहना, किसानों के बीच खेतों में पहुंचना,ये सभी दृश्य एक ऐसी राजनीतिक छवि गढ़ते हैं जिसमें नेता “ऊपर” नहीं, “बीच” में खड़ा दिखता है। यही बात उन्हें कई अन्य नेताओं से अलग करती है, जो अक्सर मंच से संवाद करते हैं, लेकिन चौपाल से नहीं।
राजनीति में दूरी घटाना सबसे कठिन काम होता है। धामी की कोशिश यही दिखाई देती है कि शासन और जनता के बीच की खाई कम हो। खाट पर बैठा मुख्यमंत्री केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक संदेश है,कि सत्ता का केंद्र सचिवालय नहीं, जनता है।
और शायद यही वजह है कि गांव की पगडंडियों से उठती यह छवि उन्हें एक जमीनी नेता के रूप में स्थापित कर रही है,ऐसा नेता जो चारपाई पर बैठकर भी उतना ही प्रभावी है, जितना किसी बड़े मंच पर। यही उनकी राजनीति की ताकत है, और यही उन्हें भीड़ से अलग पहचान देता है।

Khushi
Author: Khushi

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