मरीजों को केंद्र में रखकर दून मेडिकल अस्पताल को आधुनिक दिशा दे रहीं प्राचार्या डॉ. गीता जैन

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डॉ गीता जैन के नेतृत्व में Doon Medical College & Hospital एक बार फिर नई रफ्तार पकड़ता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से व्यवस्थाओं और संसाधनों के दबाव से जूझ रहे इस बड़े सरकारी अस्पताल को व्यवस्थित, संवेदनशील और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में जो पहल शुरू हुई है, वह धीरे-धीरे धरातल पर दिखने लगी है।
डॉ. गीता जैन की कार्यशैली का सबसे प्रमुख पहलू यह है कि उन्होंने प्रशासनिक फैसलों के केंद्र में “मरीज” को रखा है। उनके लिए अस्पताल की व्यवस्था, मशीनें, डॉक्टरों की तैनाती या व्यवस्थागत सुधार सबका उद्देश्य एक ही है कि मरीज को समय पर और सुगम इलाज मिले। यही वजह है कि अस्पताल में कई ऐसे छोटे-छोटे सुधारात्मक अभियान शुरू किए गए हैं, जिनका सीधा लाभ मरीजों और उनके परिजनों को मिल रहा है।
दून मेडिकल अस्पताल को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है। चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने, व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने और अस्पताल के कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नई कार्यप्रणालियाँ लागू की जा रही हैं। इससे अस्पताल की कार्यसंस्कृति में बदलाव भी दिखाई देने लगा है और मरीजों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है।
सरकारी अस्पतालों में अक्सर यह धारणा बन जाती है कि व्यवस्थाएँ धीमी हैं और जवाबदेही कम है, लेकिन डॉ. गीता जैन की पहल इस सोच को बदलने की कोशिश करती दिख रही है। उनका स्पष्ट संदेश है कि सरकारी अस्पताल भी आधुनिक, संवेदनशील और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बन सकते हैं, यदि नेतृत्व सक्रिय और प्रतिबद्ध हो।
एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि डॉ. गीता जैन अपने कार्य से केवल प्रशासनिक सुधार ही नहीं कर रहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की भी एक मजबूत मिसाल बन रही हैं। एक बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान का नेतृत्व करते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, स्पष्ट सोच और संवेदनशील नेतृत्व के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
आज दून मेडिकल अस्पताल में जो बदलाव की आहट सुनाई दे रही है, वह केवल व्यवस्थागत सुधार नहीं बल्कि एक नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत है — जहाँ मरीज पहली प्राथमिकता है, चिकित्सा सेवा का उद्देश्य केवल इलाज नहीं बल्कि विश्वास पैदा करना भी है। ऐसे समय में जब स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार चुनौतियों से जूझ रही है, तब डॉ. गीता जैन की पहल यह संदेश देती है कि सही नेतृत्व मिले तो सरकारी अस्पताल भी आधुनिक, व्यवस्थित और जनविश्वास का केंद्र बन सकते हैं।

Khushi
Author: Khushi

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