उत्तराखंड की राजनीति और विकास यात्रा को यदि पिछले दो दशकों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो स्पष्ट दिखाई देता है कि राज्य अब एक नए मोड़ पर खड़ा है। कभी सीमित संसाधनों और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले इस पर्वतीय राज्य ने अब जिस आर्थिक आकार और विकास की रफ्तार को हासिल किया है, वह केवल संयोग नहीं बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक दृष्टि का परिणाम है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए प्रस्तुत लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये का बजट इसी बदलती सोच और मजबूत नेतृत्व का संकेत देता है। मुख्यमंत्री धामी ने जिस तरह इस बजट को “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” की दिशा में रोडमैप बताया है, वह केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि राज्य की विकास रणनीति का स्पष्ट संकेत है।
राज्य गठन के समय उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था लगभग 14,500 करोड़ रुपये के आसपास थी, जबकि आज यह बढ़कर लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों की छलांग नहीं बल्कि उस बदलाव की कहानी है जिसमें पहाड़ की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है। प्रति व्यक्ति आय का 15 हजार रुपये से बढ़कर लगभग 2.7 लाख रुपये तक पहुंचना भी यही संकेत देता है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंचा है। यह परिवर्तन किसी भी राज्य के लिए साधारण उपलब्धि नहीं माना जा सकता।
धामी सरकार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उसने विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। FRBM अधिनियम के दायरे में रहकर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना और साथ ही विकास के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ाना प्रशासनिक कुशलता का संकेत है। अक्सर राज्यों में देखा जाता है कि लोकप्रिय योजनाओं के दबाव में वित्तीय अनुशासन कमजोर हो जाता है, लेकिन उत्तराखंड में राजस्व अधिशेष बनाए रखना यह दिखाता है कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए भी काम कर रही है।
इस बजट की संरचना को ध्यान से देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार ने विकास को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा है। गरीब, किसान, युवा और महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई योजनाएं सामाजिक संतुलन की ओर इशारा करती हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन, अन्नपूर्ति योजना, ग्रामीण और शहरी आवास योजनाएं यह दिखाती हैं कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार करना भी है। यही कारण है कि बजट में महिलाओं के लिए लगभग 19 हजार करोड़ रुपये का जेंडर बजट रखा गया है, जो मातृशक्ति को विकास की मुख्यधारा में लाने की रणनीति को दर्शाता है।
युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और खेल के क्षेत्र में किए गए बड़े प्रावधान भी यह संकेत देते हैं कि सरकार आने वाले दशक की चुनौतियों को समझ रही है। नई तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप आधारित योजनाओं पर ध्यान देना यह दर्शाता है कि उत्तराखंड को केवल पर्यटन या कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इसे आधुनिक तकनीकी अर्थव्यवस्था की ओर भी ले जाने की तैयारी की जा रही है।
धामी सरकार की एक और रणनीतिक सोच यह भी है कि राज्य की पारंपरिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर चला जाए। कुंभ मेला, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन और इको-टूरिज्म जैसे प्रावधान यह बताते हैं कि सरकार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को आर्थिक शक्ति में बदलने की दिशा में काम कर रही है। यह वही मॉडल है जिसमें संस्कृति केवल पहचान नहीं रहती बल्कि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बजट कई संकेत देता है। उत्तराखंड जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक राज्य के लिए केंद्र और राज्य के बीच मजबूत तालमेल बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस समय केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और राज्य में धामी सरकार के बीच जिस तरह का समन्वय दिखाई देता है, उसने विकास परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली बड़ी वित्तीय सहायता इसी तालमेल का परिणाम है। यही कारण है कि राज्य में आधारभूत ढांचे, सड़क, ऊर्जा और पर्यटन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में नेतृत्व का सवाल हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। कई बार सरकारें बनीं, बदलीं और नेतृत्व भी बदला, लेकिन स्थिर और दूरदर्शी नेतृत्व की चर्चा कम ही हुई। वर्तमान समय में धामी की कार्यशैली ने इस धारणा को काफी हद तक बदलने का काम किया है। युवा नेतृत्व, स्पष्ट राजनीतिक संदेश और केंद्र के साथ मजबूत तालमेल ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बना दिया है। उनकी कार्यशैली यह संकेत देती है कि वे केवल वर्तमान राजनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के विकास मॉडल को भी ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं।
कुल मिलाकर यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं बल्कि उत्तराखंड के भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज दिखाई देता है। विकास, विरासत, आधुनिकता और सामाजिक संतुलन—इन चारों स्तंभों पर आधारित यह आर्थिक खाका यह बताता है कि राज्य अब धीरे-धीरे एक नई आर्थिक पहचान की ओर बढ़ रहा है। यदि इसी तरह राजनीतिक स्थिरता, प्रशासनिक सक्रियता और केंद्र-राज्य का समन्वय बना रहा तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि उत्तराखंड की राजनीति में धामी अब तक के सबसे मजबूत और दूरदर्शी मुख्यमंत्रियों में अपनी जगह बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिनके पीछे केंद्र की मजबूत राजनीतिक शक्ति भी खड़ी है और जिनकी नजर केवल आज पर नहीं बल्कि आने वाले दशक के उत्तराखंड पर टिकी हुई है।








