
लड़कियों का शौकीन रोहित गिरी — नाम सुनते ही शायद किसी फिल्मी खलनायक की छवि बने, पर नहीं साहब, ये कोई आम आदमी नहीं, बल्कि हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर के प्रसिद्ध चंडी देवी मंदिर का महंत है। पता — चंडी घाट। काम — धर्म की आड़ में अधर्म। और अब हालात — पंजाब पुलिस के हवाले।
महंत रोहित गिरी पर लुधियाना की एक महिला ने छेड़खानी का मुकदमा दर्ज कराया। मामला यूं ही हवा में नहीं है, पंजाब पुलिस सीधा हरिद्वार आ धमकी और बड़ी ही शांति से रोहित गिरी को पकड़कर अपने साथ ले गई। मंदिर के पुजारी कम, अपराधी ज्यादा लग रहे थे जब भगवा वस्त्रों में, सिर झुकाए, गाड़ी में बैठाए गए।
कभी कहते थे कि महंत बनना त्याग का काम है, अब लगता है शौक पूरे करने का लाइसेंस बन गया है। चंडी देवी मंदिर जैसी आस्था की प्रतीक जगह पर बैठकर जब महंत का चोला पहने कोई ‘शौक़ीन मिज़ाज’ आदमी लड़कियों को शिकार बनाना शुरू करे, तो क्या ये महंत है या महाठग?
पता नहीं किस तपस्या से महंत बने थे रोहित गिरी, लेकिन अब जिस तप की जरूरत है, वो शायद जेल की कोठरी में करनी पड़ेगी। महंत बनकर उन्होंने शास्त्र नहीं, शरीर साधना शुरू कर दी थी। ये वो लोग हैं जो धर्म का ढोल पीटकर भीतर से अधर्म की बारात निकालते हैं। जिनकी नज़र साधना पर नहीं, साधन पर होती है।
चंडी घाट पर रहने वाले रोहित गिरी के खिलाफ पहले भी कई कानाफूसियाँ होती रही हैं, लेकिन जब तक पुलिस न आए, तब तक सब भगवाधारी ‘संत’ ही कहलाते हैं। अब जब आरोपों की फेहरिस्त खुली है, तो लोग कहने लगे हैं — “अरे! यही था जो कुछ दिन पहले प्रवचन में महिलाओं को ‘शुद्ध आचरण’ का पाठ पढ़ा रहा था।”
धर्म की दुकान चलाने वालों में अब ग्राहक की तरह ‘आस्था’ भी ठगी जा रही है। मंदिरों में अब भगवान कम, बाबाओं की हवस ज़्यादा नजर आने लगी है। चंडी देवी मंदिर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले रोहित गिरी जैसे लोग असल में चंडी नहीं, चांडाल हैं।
सवाल अब सिर्फ एक रोहित गिरी पर नहीं है, सवाल उन तमाम संस्थाओं पर है जो ऐसे लोगों को गद्दी पर बैठाकर उन्हें भगवान का दूत घोषित कर देती हैं। वो दूत जो रात होते ही राक्षस से भी बदतर रूप धर लेता है।
धर्म की आड़ में ऐसे पाखंडियों की असलियत सामने आना जरूरी है, ताकि अगली बार जब कोई भक्त किसी संत के पास सिर झुकाए, तो विश्वास भी साथ में झुके, डर नहीं।








