प्रीतम सिंह का ‘किला’ अडिग, देहरादून पंचायत चुनाव में कांग्रेस की डबल जीत,भाजपा की तिगड़मबाज़ी धरी रह गई, — महर्षि

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देहरादून की राजनीति में आज जो तस्वीर निकली, उसमें सिर्फ दो चेहरे नहीं जीते, बल्कि एक पूरे राजनीतिक कुनबे की मुस्कान चौड़ी हो गई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सुखविंदर कौर और उपाध्यक्ष पद पर अभिषेक सिंह की जीत कांग्रेस के लिए महज़ चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि देहरादून में अपने पुराने किले पर झंडा गाड़ने जैसा है। और हां, अभिषेक सिंह कौन हैं ये पूछने की ज़रूरत शायद सिर्फ उन लोगों को है जो उत्तराखंड की राजनीति से दूर हैं—ये वही अभिषेक हैं, जो पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और टिहरी गढ़वाल के पुराने राजनेता प्रीतम सिंह के बेटे हैं।

प्रीतम सिंह का राजनीतिक इतिहास देख लें तो यह जीत अचानक गिरी बिजली नहीं है। सात बार विधायक, एक बार मंत्री, और कई बार विपक्ष का चेहरा—प्रीतम उन नेताओं में से हैं जो विपक्ष में रहकर भी सत्ताधारी दल से ज्यादा सुर्खियां बटोर लेते हैं। देहरादून और टिहरी की राजनीति में उनकी पकड़ उतनी ही मज़बूत है जितनी चाय में इलायची की खुशबू—कम डाली जाए तो लोग नोटिस कर लेते हैं।

राजीव महृषि का यह कहना कि “प्रीतम सिंह के सामने भाजपा की तिगड़मबाज़ी नहीं चली”—दरअसल सीधे-सीधे तंज है उस पूरी मशीनरी पर, जो पंचायत चुनाव को भी विधानसभा चुनाव की तरह हाइ-प्रोफाइल बनाने की कोशिश में थी। भाजपा ने यहां जिस ‘मैनेजमेंट पॉलिटिक्स’ का ताना-बाना बुना, वह वोटिंग मशीन के बटन दबते ही उलझकर रह गया।

कांग्रेस इस जीत को 2027 की तैयारी का ट्रेलर बता रही है, मानो पंचायत चुनाव किसी पब्लिक मीटिंग का मंच हो और विधानसभा चुनाव उसकी बड़ी फिल्म। भाजपा पर भेदभाव की राजनीति करने का आरोप भी पुराना है, लेकिन इस बार तंज में थोड़ा ज्यादा नमक नज़र आया—शायद इसलिए क्योंकि प्रीतम सिंह की ‘जमीनी पकड़’ ने भाजपा के ऊपर से नीचे तक के समीकरण बिगाड़ दिए।

अब सवाल ये है कि क्या ये जीत सच में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए हवा बदलेगी, या फिर ये भी सिर्फ वही ‘स्थानीय जीत’ निकलेगी, जिसका असर जिला मुख्यालय के बाहर महसूस नहीं होता? लेकिन एक बात तय है—देहरादून के इस पंचायत चुनाव ने यह तो साफ कर दिया है कि यहां के मतदाता अब भी नेता के ‘स्थानीय कनेक्शन’ और ‘पुराने हिसाब-किताब’ को याद रखते हैं। और जहां तक प्रीतम सिंह की बात है, उनका नाम अभी भी उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा ब्रांड है, जो बिना चुनावी पोस्टर लगाए भी वोट खींच लाता है।

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Author: Khushi

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