
“सड़क पर अड़चन नहीं, अब सिर्फ एक्शन चलेगा” – DM सविन बंसल का स्पष्ट ऐलान
पौंटा-बल्लुपुर हाईवे पर एक ईंट भी नहीं रुकनी चाहिए – विकास के खिलाफ अब बर्दाश्त नहीं होगी नेतागिरी!
देहरादून। उत्तराखंड की विकास गाथा को कोई रोक नहीं सकता – खासकर जब जिलाधिकारी सविन बंसल जैसी दृढ़ इच्छाशक्ति वाला अधिकारी कमान संभाले हो। पौंटा-बल्लुपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ रही 730 मीटर की रुकावटें हों या असामाजिक तत्वों की नेतागिरी – डीएम बंसल ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सिर्फ कार्य और परिणाम की भाषा चलेगी, बाकी सब सख्ती से निपटाए जाएंगे।
‘जनहित में जो बाधा बनेगा, अब वो सीधे जेल जाएगा’
बैठक में डीएम बंसल का लहजा जितना शांत था, उतना ही असरदार। उन्होंने कहा – “यह कोई निजी ज़मीन नहीं, ये राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट है। जो इस पर राजनीति करेगा, वो खुद को कानून के शिकंजे में पाएगा।” उन्होंने ईस्टहोपटाउन, शीशमबाड़ा, प्रेमनगर और कुल्हाल में काम अटकाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। NHAI, एसडीएम और तहसीलदारों को 15 दिन की डेडलाइन—एकदम साफ़ निर्देश: काम पूरा करो या कार्रवाई झेलो।
‘अब देहरादून की फिजाओं में विकास की रफ्तार गूंजेगी’
डीएम बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा के अनुरूप, उत्तराखंड में राष्ट्रीय परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होंगी। जो इसमें बाधा बनेगा, उस पर न सिर्फ FIR दर्ज होगी बल्कि गंभीर धाराओं में मुकदमा कर जेल भेजा जाएगा। “सिर्फ फोर्स के साथ काम नहीं, अब फोकस के साथ एक्शन होगा” – यही है डीएम की कार्यशैली।
व्यंग्य में चेतावनी, शब्दों में आग – यही है सविन बंसल का अंदाज़
जो लोग खुद को ज़मीन का ठेकेदार समझते हैं और मुआवज़ा मिलने के बाद भी ज़मीन नहीं खाली करते, उनके लिए डीएम का तंज – “मुआवजा लिया है तो ज़मीन खाली करो, वरना कानून खुद आकर कब्जा लेगा।” प्रेमनगर में काउंसलिंग हो या ईस्टहोपटाउन में पुलिस बल की मौजूदगी – हर मोर्चे पर डीएम खुद नजर बनाए हुए हैं।
‘सिर्फ कुर्सी नहीं, कमांड की ताकत हैं डीएम बंसल’
जिस वक्त देश भर में अफसरशाही अक्सर फाइलों में उलझी रहती है, उसी वक्त सविन बंसल जैसे अधिकारी मैदान में उतरकर नतीजे लाते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अफसर अगर चाहे, तो केवल प्रशासन नहीं, पूरा सिस्टम जग सकता है। उनकी छवि अब केवल एक “DM” की नहीं, बल्कि “Vikas Adhikari” की बन चुकी है।
बैठक में मौजूद थे जिम्मेदारी के योद्धा
विशेष भूमि अधिकारी स्मृता परमार, एसडीएम कुमकुम जोशी, एनएचएआई से पीके मौर्य, विशाल गुप्ता, तहसीलदार विवेक राजौरी और एसडीएफओ अनिल सिंह रावत – सभी अधिकारियों को डीएम बंसल ने एक ही लाइन में खड़ा कर दिया: “परिणाम लाओ, पद नहीं गिनाओ।”
जब किसी जिले की कमान ऐसे अफसर के हाथ में हो, जो सिर्फ कुर्सी का भार न लेकर, जनता की उम्मीदों को भी अपने कंधों पर उठाता है, तो यकीन मानिए – वहां न विकास रुकता है, न सिस्टम सोता है। डीएम सविन बंसल जैसे अधिकारी उत्तराखंड की रीढ़ हैं – न डरते हैं, न झुकते हैं, बस ईमानदारी से काम करते हैं।








