धामी की सुनामी: सत्ता के सेमीफाइनल में विपक्ष साफ, पहाड़ पर भगवा लहर का जलवा

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देहरादून की राजनीति में इस बार मानो सत्ता का सेमीफाइनल खेला गया हो, और पिच पर बल्लेबाजी कर रहे थे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। उन्होंने ऐसी धुंआधार पारी खेली कि विपक्ष चारों खाने चित होकर पवेलियन लौट गया। पहाड़ की गलियों से लेकर मैदान के मोड़ों तक, सिर्फ धामी की आंधी ही चली—ऐसी कि पत्ते क्या, विपक्ष के पत्तल भी उड़ गए।

जिला पंचायत चुनाव में 12 में से 10 सीटें भाजपा के झोली में आईं, नैनीताल का रिज़ल्ट अभी बाकी है, लेकिन माहौल ऐसा है कि वहां भी कमल खिलने की उम्मीद में कार्यकर्ता झूम रहे हैं। ब्लॉक प्रमुख के 70% पदों पर भाजपा का परचम लहराया, और ग्राम प्रधान की 85% सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाकर साफ कर दिया कि सत्ता की राह 2027 में भी पहाड़ की चोटी से होकर ही जाएगी।

धामी का यह ‘पंच’ विपक्ष के कई सियासी सूरमाओं के गणित को बुरी तरह बिगाड़ गया। जिन्होंने सोचा था कि पंचायत चुनाव में भाजपा का दबदबा कम होगा, वे अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि धामी की यह लय अगर विधानसभा तक जारी रही, तो विपक्ष को ‘तैयारी’ के नाम पर सिर्फ बैठकें ही करनी पड़ेंगी।

इस चुनाव ने यह भी साबित कर दिया कि भाजपा का जमीनी संगठन अभी भी तगड़ा है, और पहाड़ के गांव-गांव में धामी का नाम सुनते ही लोग सिर हिलाकर कहते हैं—”काम बोलता है”। विपक्ष के लिए यह नतीजे किसी ‘प्री-बोर्ड परीक्षा’ जैसे हैं, जिसमें नंबर कम आए तो असली परीक्षा में पास होना और मुश्किल हो जाता है।

धामी ने एक बार फिर दिखा दिया कि पहाड़ में राजनीति सिर्फ वादों से नहीं, बल्कि काम और रणनीति से जीती जाती है। विपक्ष चाहे इसे आंकड़ों का खेल माने या ‘सरकारी मशीनरी का कमाल’, हकीकत यही है कि इस बार पंचायत के मैदान में कमल ने विपक्ष की उम्मीदों को पूरा का पूरा ‘काट’ दिया है।

Khushi
Author: Khushi

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